
1980 के दशक का बॉलीवुड आज की तरह PR-driven नहीं, Punch-driven था। राज एन सिप्पी द्वारा निर्देशित “Loha” (1987) उसी दौर की फिल्म है जहाँ कहानी में पसीना, डायलॉग में आग और सिस्टम पर सीधा वार दिखता है।
यह सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं थी — यह भ्रष्ट राजनीति, लाचार सिस्टम और अकेले ईमानदार अफसर की चीख थी।
सिस्टम बिक गया, बंदूक सस्ती हो गई
मुंबई का ईमानदार पुलिस इंस्पेक्टर अमर (Dharmendra) — जो वर्दी को नौकरी नहीं, जिम्मेदारी मानता है। जब वह भ्रष्ट नेता जगन्नाथ प्रसाद (Kader Khan) को गिरफ्तार करता है, तो सिस्टम वही करता है जो सिस्टम हमेशा करता है — ईमानदार को डांट, भ्रष्ट को छूट।
इधर खूंखार डाकू शेर सिंह (Amrish Puri) एक बस हाईजैक कर लेता है और 25 बंधकों के बदले 25 अपराधियों की रिहाई मांगता है।
इस मिशन में शामिल होते हैं — कासिम अली (Shatrughan Sinha), करण (Karan Kapoor) लेकिन सवाल ये नहीं कि दुश्मन कौन है, सवाल ये है कि धोखा अंदर से कौन देगा?
Dharmendra as Inspector Amar
कम डायलॉग, ज्यादा Impact। आज के “Silent Hero” का OG Version।
Amrish Puri as Sher Singh
Villain नहीं, चलता-फिरता आतंक। उनकी आवाज़ ही Background Score थी।

Shatrughan Sinha
Dialogue delivery में sarcasm और swagger — “खामोश” नहीं, सीधा वार।
Kader Khan
नेता के रोल में वही पुराना सवाल — कुर्सी बड़ी या कानून?
Music & Songs: 80s का Desi Swagger
Farooq Kaiser के लिखे गीतों में वो दौर झलकता है जहाँ lyrics subtle नहीं, सीधे दिल पर होते थे।
- “तू लड़की नंबर वन है” – Massy Entertainment
- “तेरी हस्ती है क्या” – Power-packed chorus
- “पतली कमर लंबे बाल” – 80s Bollywood flavour
Loha हमें याद दिलाती है कि ईमानदारी हमेशा अकेली होती है, लेकिन कमजोर नहीं।
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